उत्तर प्रदेशबस्तीलखनऊ

।। रुधौली विकास खंड की ग्राम पंचायत छतरिया में मनरेगा कार्यों में भारी फर्जीवाड़ा ।।

।। चकमार्ग पर महीनों से उगी घास ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए।।

अजीत मिश्रा (खोजी)

।। भ्रष्टाचार की चपेट में बीडीओ रुधौली की कुर्सी, जनता सवालों में उलझी ।।

⭐ दलदल में डूबती कुर्सी और इज्जत दोनों खतरे में।

⭐ चकमार्ग पर उगी घास और दोनों तरफ खेतो में गेहूँ ने खोली पोल।

⭐ सच्चाई को किसी बयान की जरूरत नहीं बगल की जमीन खुद दे रही गवाही।

⭐ गाय-भैंस भी समझ जाए कि फर्जी हाजिरी रजिस्टर में हो रही दर्ज।

 13 दिसंबर 25, उत्तर प्रदेश ।

बस्ती ।। रुधौली विकास खंड की ग्राम पंचायत छतरिया में मनरेगा कार्यों में भारी फर्जीवाड़ा चल रहा है। मनरेगा के दो कार्यस्थलों पर 61 मजदूर कागज़ों मे दिखाए गए हैं , जबकि जमीन पर एक भी मजदूर नहीं मिला। दो कार्यों पर जारी 7 मस्टरोल के बावजूद दोनों साइटों पर सन्नाटा और चकमार्ग पर महीनों से उगी घास ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली साइट मोहम्मद उमर से विजय के खेत तक मास्टर रोल में 38 मजदूर, जमीन पर शून्य न कोई ताज़ी खुदाई, न मिट्टी की हलचल, चकमार्ग पर घास अगल बगल गेहूं की फसल दूसरी साइट नजीबुल्लाह से कलावती के खेत तक 23 मजदूर दर्ज, लेकिन साइट का दृश्य भी हूबहू वही है कोई निर्माणगत गतिविधि का चिन्ह तक नहीं मिला। चकमार्ग पर उगी घास और दोनों तरफ खेतो में गेहूँ यहां किसी बयान या कागज़ी रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं जमीन ने खुद सच बयां कर दिया। चकमार्गों पर उगी घास और खेतों में गेहूं की फसल यह साबित कर रही है कि फर्जी हाजिरी के सहारे फर्जी भुगतान का प्रयास चल रहा है। चकमार्ग के किनारे खेतों में गेहूं की फसल कागजों में दर्ज भारी भीड़ के बीच अंतर मनरेगा कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है और यह बना हुआ है कि रुधौली बीडीओ की निगरानी नाकाम साबित हुई है। फील्ड में जीरो विजिट और फाइलों में 100 प्रतिशत काम के दावे ने भ्रष्टाचारियों का मनोबल बढ़ाया है। बीडीओ की चुप्पी अब उनकी सबसे बड़ी ढाल बनी हुई है।कागज़ों में 69, मैदान में 0… मस्टरोल और अटेंडेंस की धज्जियां उड़ रहीं, जिम्मेदारो की खामोशी मनरेगा की यह स्थिति न सिर्फ प्रणाली की साख पर प्रश्न चिन्ह है बल्कि बीडीओ की मनमानी और लापरवाही से मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की छवि पर भी बट्टा लग रहा है। जमीन पर फर्जीवाड़ा जिम्मेदारों की मिलीभगत से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। छतरिया के चकमार्गों की जमीनी हकीकत ने एक बार फिर मनरेगा निगरानी तंत्र की पोल खोल दी है।

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